1299 ई. के आसपास दिल्ली सल्तनत की सेनाओं ने गुजरात पर बड़ा सैन्य अभियान चलाया। इस अभियान का नेतृत्व अलाउद्दीन खिलजी के सेनापतियों ने किया और अनेक समृद्ध नगर तथा धार्मिक प्रतिष्ठान इसकी चपेट में आए। सोमनाथ का मंदिर भी उन स्थानों में था जिनका उल्लेख मध्यकालीन फारसी इतिहासकारों के विवरणों में मिलता है।

मध्यकालीन दरबारी इतिहास केवल घटनाओं की सूची नहीं होते थे। उनमें शासक की प्रतिष्ठा, धार्मिक भाषा, सैन्य विजय और राजनीतिक संदेश अक्सर एक-दूसरे में मिले रहते हैं। इसलिए किसी एक लेखक या एक उद्धरण के आधार पर पूरी घटना का अर्थ तय करना उचित नहीं है।

गुजरात उस समय व्यापार, बंदरगाहों और धन-संपदा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र था। इसलिए खिलजी अभियान को केवल धार्मिक कोण से देखना अधूरा होगा। इसमें साम्राज्य-विस्तार, राजस्व, व्यापारिक मार्गों पर नियंत्रण और स्थानीय राजनीतिक प्रतिरोध को तोड़ने की रणनीति भी थी।

मंदिरों और नगरों की लूट मध्यकालीन युद्ध की कठोर राजनीति का हिस्सा थी। प्रतिष्ठित धार्मिक या राजकीय संस्थानों पर हमला कई बार शक्ति-प्रदर्शन का माध्यम भी बनता था। सोमनाथ की पहले से मौजूद ऐतिहासिक स्मृति ने इस अभियान के उल्लेख को और अधिक प्रतीकात्मक बना दिया।

अलाउद्दीन खिलजी के गुजरात अभियान में सोमनाथ पर हमला हुआ—यह फारसी इतिहासलेखन और बाद की परंपराओं में दर्ज है। लेकिन गंभीर इतिहासलेखन के लिए सैन्य, आर्थिक, राजनीतिक और धार्मिक सभी आयामों को साथ देखना आवश्यक है।

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