चतुरंग का नाम संस्कृत के “चतुर्” और “अंग” से बना है—अर्थात सेना के चार अंग: पैदल सेना, घुड़सवार, हाथी और रथ। इसी सैन्य कल्पना को बोर्ड पर रणनीतिक खेल में रूपांतरित किया गया। विद्वानों के बीच प्रारंभिक इतिहास के कुछ विवरणों पर मतभेद हैं, लेकिन सामान्यतः चतुरंग को आधुनिक शतरंज की प्रमुख पूर्वज परंपराओं में माना जाता है।
भारत से यह खेल ईरान पहुँचा, जहाँ उसका रूप “शतरंज” के रूप में विकसित हुआ। भारतीय राजा का मोहरा फारसी “शाह” बना और “शाह मात” जैसी अभिव्यक्ति आगे चलकर यूरोपीय भाषाओं में checkmate के रूप में पहुँची।
समय के साथ मोहरों की चाल और पहचान बदलती रही। हाथी, रथ और मंत्री के रूप अलग-अलग क्षेत्रों में नए नाम और नई चालें लेते गए। आधुनिक शतरंज की तेज़ चालें और शक्तिशाली queen का रूप बाद के यूरोपीय विकास हैं।
चतुरंग का आकर्षण केवल इसकी प्राचीनता में नहीं है। यह दिखाता है कि युद्ध, भूगोल और राजनीतिक रणनीति की अवधारणाओं को अमूर्त खेल में कैसे बदला गया। खिलाड़ी को सीधे बल से अधिक स्थिति, समय और संयोजन की समझ चाहिए।
आज शतरंज विश्व का सार्वभौमिक खेल है, लेकिन उसकी कहानी में भारत की प्राचीन बौद्धिक संस्कृति की गहरी छाप मौजूद है। चतुरंग इस बात का सुंदर उदाहरण है कि कोई स्थानीय कल्पना कैसे अनेक सभ्यताओं से गुजरकर वैश्विक सांस्कृतिक धरोहर बन सकती है।
