कामसूत्र का संबंध सामान्यतः गुप्तकाल के आसपास की बौद्धिक दुनिया से जोड़ा जाता है, यद्यपि उसकी निश्चित तिथि पर बहस है। यह “काम” अर्थात इच्छा और प्रेम को मानव जीवन के वैध उद्देश्यों में से एक मानता है, लेकिन उसे धर्म और अर्थ से अलग नहीं करता।

लोकप्रिय धारणा के विपरीत, ग्रंथ का केवल छोटा हिस्सा यौन आसनों से जुड़ा है। इसमें साथी चुनने, विवाह, दांपत्य, शहरी शिष्टाचार, प्रेम-संदेश, सामाजिक मेलजोल और गणिकाओं की आर्थिक-सामाजिक स्थिति पर भी चर्चा है।

कामसूत्र जिस समाज का वर्णन करता है वह मुख्यतः शिक्षित और अपेक्षाकृत संपन्न शहरी वर्गों का संसार है। संगीत, सुगंध, वस्त्र, उद्यान, उत्सव और मित्र-मंडली उस जीवन शैली के हिस्से हैं। इसलिए इसे पूरे प्राचीन भारत की रोज़मर्रा की तस्वीर मानना गलत होगा।

ग्रंथ में महिलाओं की इच्छा और आनंद को कई स्थानों पर स्वीकार किया गया है, जो इसे रोचक बनाता है। साथ ही अनेक अध्याय पितृसत्तात्मक सामाजिक मान्यताओं से बंधे हैं। आधुनिक पाठक को दोनों पक्ष साथ देखने चाहिए।

कामसूत्र सामाजिक इतिहास के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह इच्छा जैसे निजी विषय को भी परिवार, वर्ग, धन और प्रतिष्ठा से जोड़ता है। इसे सनसनी से हटाकर पढ़ने पर प्राचीन भारतीय शहरी संस्कृति की समृद्ध तस्वीर सामने आती है।

संपादकीय टिप्पणी: मूल लेख की विषयवस्तु को हिंदी प्रकाशन के लिए पुनर्लिखा और भाषा की दृष्टि से संपादित किया गया है। विवादित दावों में सावधानीपूर्ण शब्दावली रखी गई है।