मुगल साम्राज्य में शहज़ादे केवल महल में पले उत्तराधिकारी नहीं थे। उन्हें कम आयु से प्रशासन, घुड़सवारी, सैन्य नेतृत्व और दरबारी राजनीति से परिचित कराया जाता था। प्रांतों की सूबेदारी और अभियानों का नेतृत्व अक्सर उनकी राजनीतिक शिक्षा का हिस्सा होता था।
मुगलों में ऐसा कठोर ज्येष्ठाधिकार नियम नहीं था कि सबसे बड़ा पुत्र स्वतः सम्राट बनेगा। परिणामस्वरूप सम्राट की मृत्यु या बीमारी के समय राजकुमारों के बीच संघर्ष की संभावना रहती थी। हुमायूँ और कामरान, जहाँगीर और खुसरो तथा शाहजहाँ के पुत्रों के बीच संघर्ष इसके उदाहरण हैं।
बाबर स्वयं मध्य एशियाई युद्ध संस्कृति से आया था। उसके उत्तराधिकारियों के लिए भी घुड़सवारी, तीरंदाजी और सैनिक अनुशासन राजकीय पहचान का हिस्सा रहे। बाद में तोपखाना, बंदूक और भारी घुड़सवार सेना ने मुगल सैन्य व्यवस्था को और जटिल बना दिया।
मुगल राजकुमारों की कथाएँ वीरता के साथ-साथ महत्वाकांक्षा और क्रूर राजनीति भी दिखाती हैं। सत्ता संघर्ष में भाइयों की हार, कैद और मृत्यु असामान्य नहीं थी। इसलिए उन्हें केवल “जन्मजात शासक” कहना रोमांचक तो है, पर इतिहास अधिक कठिन और मानवीय है।
मुगल राजनीतिक संस्कृति में शासन और युद्ध अलग संसार नहीं थे। शहज़ादे को दरबार की भाषा, राजस्व, मनसबदारी और कूटनीति के साथ युद्धक्षेत्र में सैनिकों का भरोसा भी अर्जित करना पड़ता था।
